Click to Call
+91-7217619956
    Click to Call
  +91-7217619956
Dev Uthani Ekadashi देव उठनी एकादशी

Dev Uthani Ekadashi देव उठनी एकादशी

` 8850 | $ 130.00 Buy Now

देव उठनी के दिन विष्णु अभिषेक

इस बार देव उठनी एकादशी 19 नवंबर को है. इस दिन हिंदु धर्म में भगवान विष्णु जी  के लिए व्रत रखा जाता है. क्योंकि वो चार महीने की नींद के बाद जागते हैं. देवोत्थान एकादशी  के साथ-साथ इसी दिन भगवान विष्णु के पत्थर रूप शालिग्राम का तुलसी से विवाह  जाता है. देव उठनी एकादशी  के लिए विष्णु भक्त ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर सूर्य को अर्घ्य देते हुए व्रत का संकप्ल लेते हैं. विष्णु जी को पूजा में बेल पत्र, शमी पत्र और तुलसी चढ़ाई जाती है. वहीं, कुछ भक्त देव उठनी एकादशी की रात सोते नहीं बल्कि देवों को उठाने के लिए रात-भर भजन-कीर्तन करते हैं. यहां जानिए कि आखिर क्यों भगवान विष्णु चार महीनों के लिए सोते हैं?

विष्णु जी क्यों सोते हैं चार महीने

पौराणिक कथाओं के मुताबिक भगवान विष्णु असुरों का नाश करने तो कभी भक्तों पर कृपा बरसाने के लिए वर्षों सोते नहीं थे. तो कभी अचानक ही वो लाखों वर्षों के लिए सो जाया करते थे. विष्णु जी की इस असमय नींद की वजह से माता लक्ष्मी विश्राम नहीं कर पाती थीं. इसीलिए मां लक्ष्मी ने एक बार विष्णु जी से कहा, हे नाथ! आप समय से नींद नहीं लेते, दिन-रात जागते हैं और फिर कभी अचानक सो जाते हैं. आप नियम से प्रतिवर्ष निद्रा लिया करें. ऐसा करके मुझे भी विश्राम करने का समय मिल जाएगा. 

इस बात को सुन विष्णु जी मुस्कुराए और बोले, हे देवी! आपने ठीक कहा. मेरे जागने से आप ही नहीं बल्कि सभी देवों को भी कष्ट हो जाता है. मेरी सेवा के कारण आपको भी आराम नहीं मिल पाता. इसीलिए अब से मैं प्रतिवर्ष नियम से चार माह की निद्रा लूंगा. ऐसे आपको और सभी देवगणों को विश्राम का अवसर मिल सकेगा.

इस कथा के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु चार महीनों के लिए सोते हैं और कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी  के दिन जागते हैं. देव उठनी एकादशी के बाद सभी शुभ कार्यों की शुरुआत होती है. हिंदू धर्म में इसी दिन के बाद शादियां शुरू हो जाती हैं.

देवउठनी एकादशी पर विष्णु पूजा में जरुर करें इन चीज़ों का उपयोग, मनोकामनाएं होंगी पूरी

देवोत्थान एकादशी के दिन विष्णु जी की पूजा में कुछ विशेष चीजों का इस्तेमाल करना बहुत आवश्यक होता है। इन चीज़ों का इस्तेमाल करने से व्यक्ति के धन में वृद्धि के साथ-साथ सभी मनोकामनाएं भी पूरी होती है। आइए जानते हैं किन चीजों का इस्तेमाल करना बहुत शुभ होता है....

पुराणों और शास्त्रों के अनुसार भगवान विष्णु की पूजा में पंचामृत का होना आवश्यक होता है, बिना पंचामृत के विष्णु जी की पूजा नहीं मानी जाती है। इसलिए एकादशी के दिन भगवान विष्णु को दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से बने पंचामृत का भोग जरुर लगाएं।

यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा की स्थिति खराब है और उसकी स्थिति सुधारना चाहते हैं तो एकादशी के दिन भगवान विष्णु को दूध का भोग लगाएं। क्योंकि दूध को धर्म के और मन पर प्रभाव के दृष्टिकोण से सात्विक माना जाता है।

एकदाशी के दिन तुलसी विवाह में गन्ने का मंडप बनाकर पूजा करें और भगवान विष्णु को भोग में गन्ना अर्पित करें। ऐसा करने से हमेशा ही घर में सुथ-शांति बनी रहती है।

माना जाता है की भगवान विष्णु को केला बहुत अच्छा लगता है, इसलिए जब भगवान चार महीने बाद जागते हैं तो केले को भोग के रूप में चढ़ाया जाता है। बताया जाता है ऐसा करने से घर में हमेशा धन वृद्धि होती है।

एकादशी के दिन जल सिंघारा बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि जल सिंघारा मां लक्ष्मी का बहुत प्रिय फल माना जाता है। एकादशी के दिन जल सिंघारा का भोग लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है और धन वर्षा करती है।

एकादशी के दिन तिल का भोग लगाने से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिल जाती है। इस दिन तिल के दान का भी विशेष महत्व है, बताया जाता है जो भी भक्त तिल दान करता है, वह कभी नरक के दर्शन नहीं करता।

~रिचा यादव

 

Dev Uthani Ekadashi देव उठनी एकादशी

Dev Uthani Ekadashi देव उठनी एकादशी

8850 130.00

देव उठनी के दिन विष्णु अभिषेक

इस बार देव उठनी एकादशी 19 नवंबर को है. इस दिन हिंदु धर्म में भगवान विष्णु जी  के लिए व्रत रखा जाता है. क्योंकि वो चार महीने की नींद के बाद जागते हैं. देवोत्थान एकादशी  के साथ-साथ इसी दिन भगवान विष्णु के पत्थर रूप शालिग्राम का तुलसी से विवाह  जाता है. देव उठनी एकादशी  के लिए विष्णु भक्त ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर सूर्य को अर्घ्य देते हुए व्रत का संकप्ल लेते हैं. विष्णु जी को पूजा में बेल पत्र, शमी पत्र और तुलसी चढ़ाई जाती है. वहीं, कुछ भक्त देव उठनी एकादशी की रात सोते नहीं बल्कि देवों को उठाने के लिए रात-भर भजन-कीर्तन करते हैं. यहां जानिए कि आखिर क्यों भगवान विष्णु चार महीनों के लिए सोते हैं?

विष्णु जी क्यों सोते हैं चार महीने

पौराणिक कथाओं के मुताबिक भगवान विष्णु असुरों का नाश करने तो कभी भक्तों पर कृपा बरसाने के लिए वर्षों सोते नहीं थे. तो कभी अचानक ही वो लाखों वर्षों के लिए सो जाया करते थे. विष्णु जी की इस असमय नींद की वजह से माता लक्ष्मी विश्राम नहीं कर पाती थीं. इसीलिए मां लक्ष्मी ने एक बार विष्णु जी से कहा, हे नाथ! आप समय से नींद नहीं लेते, दिन-रात जागते हैं और फिर कभी अचानक सो जाते हैं. आप नियम से प्रतिवर्ष निद्रा लिया करें. ऐसा करके मुझे भी विश्राम करने का समय मिल जाएगा. 

इस बात को सुन विष्णु जी मुस्कुराए और बोले, हे देवी! आपने ठीक कहा. मेरे जागने से आप ही नहीं बल्कि सभी देवों को भी कष्ट हो जाता है. मेरी सेवा के कारण आपको भी आराम नहीं मिल पाता. इसीलिए अब से मैं प्रतिवर्ष नियम से चार माह की निद्रा लूंगा. ऐसे आपको और सभी देवगणों को विश्राम का अवसर मिल सकेगा.

इस कथा के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु चार महीनों के लिए सोते हैं और कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी  के दिन जागते हैं. देव उठनी एकादशी के बाद सभी शुभ कार्यों की शुरुआत होती है. हिंदू धर्म में इसी दिन के बाद शादियां शुरू हो जाती हैं.

देवउठनी एकादशी पर विष्णु पूजा में जरुर करें इन चीज़ों का उपयोग, मनोकामनाएं होंगी पूरी

देवोत्थान एकादशी के दिन विष्णु जी की पूजा में कुछ विशेष चीजों का इस्तेमाल करना बहुत आवश्यक होता है। इन चीज़ों का इस्तेमाल करने से व्यक्ति के धन में वृद्धि के साथ-साथ सभी मनोकामनाएं भी पूरी होती है। आइए जानते हैं किन चीजों का इस्तेमाल करना बहुत शुभ होता है....

पुराणों और शास्त्रों के अनुसार भगवान विष्णु की पूजा में पंचामृत का होना आवश्यक होता है, बिना पंचामृत के विष्णु जी की पूजा नहीं मानी जाती है। इसलिए एकादशी के दिन भगवान विष्णु को दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से बने पंचामृत का भोग जरुर लगाएं।

यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा की स्थिति खराब है और उसकी स्थिति सुधारना चाहते हैं तो एकादशी के दिन भगवान विष्णु को दूध का भोग लगाएं। क्योंकि दूध को धर्म के और मन पर प्रभाव के दृष्टिकोण से सात्विक माना जाता है।

एकदाशी के दिन तुलसी विवाह में गन्ने का मंडप बनाकर पूजा करें और भगवान विष्णु को भोग में गन्ना अर्पित करें। ऐसा करने से हमेशा ही घर में सुथ-शांति बनी रहती है।

माना जाता है की भगवान विष्णु को केला बहुत अच्छा लगता है, इसलिए जब भगवान चार महीने बाद जागते हैं तो केले को भोग के रूप में चढ़ाया जाता है। बताया जाता है ऐसा करने से घर में हमेशा धन वृद्धि होती है।

एकादशी के दिन जल सिंघारा बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि जल सिंघारा मां लक्ष्मी का बहुत प्रिय फल माना जाता है। एकादशी के दिन जल सिंघारा का भोग लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है और धन वर्षा करती है।

एकादशी के दिन तिल का भोग लगाने से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिल जाती है। इस दिन तिल के दान का भी विशेष महत्व है, बताया जाता है जो भी भक्त तिल दान करता है, वह कभी नरक के दर्शन नहीं करता।

~रिचा यादव

 

` 8850 | $ 130.00 Buy Now